राष्ट्र चंडिका न्यूज़.सिवनी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान, जिसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादों और कारीगरों को बढ़ावा देना है, उसे लेकर सिवनी जिले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जिला संगठन की कथनी और करनी में बड़ा विरोधाभास देखने को मिला है। यह मामला तब सामने आया जब दीपावली पर्व के दौरान, जहां एक ओर देश भर में और जिले में भी लोग बढ़-चढ़कर स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित मिट्टी के दीये, हस्तशिल्प और सजावटी सामान खरीदने की अपील कर रहे थे, वहीं सिवनी जिला भाजपा कार्यालय की सजावट विदेशी, विशेषकर चीनी (चाइनीज) झालरों से की गई थी।
स्थानीय कारीगरों की उपेक्षा का आरोप:
दीपावली के समय, ‘वोकल फॉर लोकल’ के तहत, नागरिकों से आग्रह किया जाता है कि वे स्थानीय कुम्हारों और दस्तकारों द्वारा बनाए गए दीयों और अन्य सामानों को प्राथमिकता दें, ताकि उनकी आजीविका सुरक्षित रहे और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। सिवनी जिला प्रशासन और विभिन्न सामाजिक संगठन भी इस दिशा में सक्रिय थे।
कार्यालय की सजावट पर सवाल:ठीक इसी समय, सिवनी जिला भाजपा कार्यालय, जो कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली पार्टी का प्रतिनिधित्व करता है, विदेशी मूल की, सस्ती और अक्सर पर्यावरण के लिए हानिकारक मानी जाने वाली चीनी झालरों से जगमगाता दिखा। यह दृश्य प्रधानमंत्री के उस संदेश के ठीक विपरीत था, जिसमें उन्होंने देशवासियों से स्थानीय उत्पादों को खरीदने और उनका प्रचार करने का आह्वान किया है।
संगठन पर उठा मखौल उड़ाने का आरोप:
स्थानीय लोगों और विपक्षी दलों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि जिस पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ का नारा दे रहा है, उसी का जिला स्तरीय संगठन इस अभियान की गंभीरता को नहीं समझ रहा है और खुले तौर पर इसका मखौल उड़ा रहा है।
जिम्मेदारों की चुप्पी:
इस मामले पर जब सिवनी जिला भाजपा संगठन के पदाधिकारियों से संपर्क साधने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया। संगठन की ओर से इस बात का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है कि ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान को दरकिनार करते हुए विदेशी उत्पादों का उपयोग क्यों किया गया।
यह घटना दिखाती है कि प्रधानमंत्री के बड़े अभियानों को निचले स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करने और उसके प्रति गंभीरता दिखाने में स्थानीय भाजपा संगठन कितना गंभीर है। इस विरोधाभासी कदम ने जिले भर में पार्टी की ‘राष्ट्रवाद’ और ‘आत्मनिर्भरता’ की प्रति प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।