NEET Paper Leak Updates: पेपर लीक पर सरकार का बड़ा एक्शन, फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सख्त बिल के ऐलान के बाद विनीत जोशी का ट्रांसफर
पेपर लीक के गंभीर मुद्दे को लेकर पिछले करीब एक महीने से दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगातार जारी छात्रों के देशव्यापी आंदोलन के बीच अब केंद्र सरकार इस मामले में पूरी तरह एक्टिव मोड में आ गई है. खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते गुरुवार को इस मसले पर चंद घंटों के भीतर दो ऐसे कड़े और महत्वपूर्ण संदेश दिए, जो यह साफ बताते हैं कि सरकार इस पूरे प्रकरण को कितनी गंभीरता से ले रही है. इसी का परिणाम है कि अब इस मामले में तेजी से बड़े प्रशासनिक और कानूनी कदम उठाए जाने लगे हैं. पीएम मोदी ने गुरुवार सुबह ही अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह बड़ा ऐलान किया था कि इस संवेदनशील केस के त्वरित और निष्पक्ष निजतारण के लिए विशेष ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट्स’ का गठन किया जाएगा, जिसके लिए संबंधित विभागों को जरूरी निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं.
📜 कैबिनेट की बैठक में नए सख्त कानून पर चर्चा, सोमवार को संसद में पेश होगा बिल
इसके बाद गुरुवार देर रात जारी अपने एक वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने देश को जानकारी दी कि शुक्रवार को होने वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की बैठक में पेपर लीक के खिलाफ बेहद कड़े प्रावधानों वाले एक नए बिल पर विस्तार से चर्चा की जाएगी. उन्होंने बताया कि कैबिनेट सहयोगियों के सुझावों और आपसी मंथन के आधार पर इस प्रस्तावित कानून को अंतिम रूप दिया जाएगा. इसके बाद, आगामी सप्ताह में सोमवार से शुरू हो रहे मानसून सत्र के दूसरे हफ्ते के दौरान इस सख्त प्रावधानों वाले विधेयक को संसद के पटल पर पेश किया जाएगा. उन्होंने देशवासियों को यह पूरा भरोसा भी दिलाया है कि सरकार इस महत्वपूर्ण बिल को जल्द से जल्द संसद से पास कराने की पूरी कोशिश करेगी.
🥤 केंद्रीय मंत्रियों के प्रयासों से टूटी सोनम वांगचुक की 25 दिनों की भूख हड़ताल
एक तरफ जहां सरकार संसद और कानून के स्तर पर कड़े फैसले ले रही थी, वहीं दूसरी तरफ पर्दे के पीछे जंतर-मंतर के आंदोलन को थामने के प्रयास भी तेजी से चल रहे थे. पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पिछले 25 दिनों से चली आ रही आमरण भूख हड़ताल को समाप्त कराने के लिए सरकार की तरफ से उच्चस्तरीय पहल की गई. मेदांता अस्पताल में भर्ती वांगचुक का अनशन तुड़वाने के लिए सरकार ने अपने दो वरिष्ठ मंत्रियों को मौके पर भेजा. मोदी सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह गुरुवार देर रात अस्पताल पहुंचे और सोनम वांगचुक से लंबी मुलाकात की. सरकार की तरफ से उन्हें पेपर लीक से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर ठोस लिखित आश्वासन दिया गया, जिसके बाद वांगचुक ने जूस पीकर आखिरकार अपना लंबा अनशन समाप्त कर दिया.
🙏 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य लाभ की कामना की
सोनम वांगचुक द्वारा अनशन समाप्त किए जाने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक और महत्वपूर्ण पोस्ट साझा किया. इसमें उन्होंने सोनम के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करने के साथ-साथ यह विनम्र अनुरोध भी किया कि वे डॉक्टरों की सभी सलाह का पूरी तरह पालन करें और अपनी दिनचर्या को नियंत्रित रखते हुए जल्द से जल्द अपना पुराना स्वास्थ्य और वजन वापस हासिल करें.
👮 विवादों के बीच प्रशासन का कड़ा एक्शन: डीसीपी संदीप लांबा और सचिव विनीत जोशी हटाए गए
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर भी दो बड़े और कड़े फेरबदल किए हैं. बीते 20 जुलाई को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’, छात्र संगठनों और विभिन्न समूहों द्वारा ‘संसद मार्च’ का आह्वान किया गया था. इस मार्च के दौरान जब प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका गया, तो स्थिति काफी तनावपूर्ण और हिंसक हो गई थी. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े. इसी गहमागहमी के बीच एडिशनल डीसीपी संदीप लांबा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें वह एक महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारते हुए साफ नजर आ रहे थे. इस घटना के बाद से जनता और विभिन्न राजनीतिक दलों में भारी आक्रोश व्याप्त था, जिसके बाद अब उन्हें मुख्य प्रदर्शन स्थल की ड्यूटी से हटाकर वापस उनके मूल जिले में भेज दिया गया है. इसके अलावा, एक अन्य बड़े प्रशासनिक बदलाव के तहत उच्च शिक्षा विभाग के सचिव विनीत जोशी को भी तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटा दिया गया है. सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, विनीत जोशी को अब पंचायती राज मंत्रालय में स्थानांतरित कर दिया गया है, जबकि उनकी जगह वरिष्ठ अधिकारी नरेश गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग के नए सचिव के रूप में नियुक्त किया गया है.
🏛️ संसद में चर्चा को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़ा विपक्ष
इन तमाम प्रशासनिक और राजनीतिक हलचलों के बीच संसद के भीतर भी गहमागहमी अपने चरम पर है. केंद्र सरकार का यह कहना है कि वह संसद के पटल पर इस पूरे मुद्दे पर खुलकर चर्चा करने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी दल और कांग्रेस पार्टी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं. भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और विपक्ष पर कड़ा पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि एनडीए सरकार हर प्रकार की बहस के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष संसद में सार्थक चर्चा करने से भाग रहा है. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने कल गुरुवार को दावा किया कि राहुल गांधी और पूरा विपक्ष देश के युवाओं और छात्रों से जुड़े इस गंभीर विषय पर संसद में आमने-सामने की बहस से बच रहा है, क्योंकि वे अच्छी तरह जानते हैं कि चर्चा होने पर उनका दोहरा चरित्र और राजनीति देश के सामने बेनकाब हो जाएगी. इसी खींचतान के बीच गुरुवार को संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसद मकर द्वार के बाहर एकत्र हुए और एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते नजर आए, जिससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह राजनीतिक घमासान और अधिक तेज होने वाला है.
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