कोचिंग सेंटर सफल छात्रों की फोटो लगाकर कर रहे प्रचार, क्या सरकार के दिशा-निर्देशों का हो रहा उल्लंघन?
राष्ट्र चंडिका न्यूज़, सिवनी.शहर में तेजी से बढ़ते कोचिंग संस्थानों के बीच प्रतिस्पर्धा ने एक नई बहस को जन्म दिया है। कई कोचिंग सेंटर अपने प्रचार में सफल छात्रों की तस्वीरें और नाम prominently प्रदर्शित कर रहे हैं। यह तस्वीरें बोर्ड परीक्षाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं या अन्य शैक्षणिक उपलब्धियों से जुड़ी होती हैं। लेकिन सवाल यह उठता है — क्या यह तरीका वैध है और क्या यह केंद्र सरकार द्वारा तय दिशा-निर्देशों के अनुरूप है?
सरकारी दिशा-निर्देश क्या कहते हैं?-
शिक्षा मंत्रालय और उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा समय-समय पर जारी किए गए दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि:
1.विद्यार्थी की स्पष्ट सहमति के बिना उसकी तस्वीर या उपलब्धि को किसी प्रचार सामग्री में उपयोग करना गलत है।
2. यदि तस्वीर लगाई भी जाती है, तो कोचिंग संस्थान को यह साबित करना होगा कि छात्र वास्तव में उसी संस्था से पढ़ा है और उसका प्रदर्शन उसी के मार्गदर्शन में हुआ है।
3.भ्रामक विज्ञापन अधिनियम (Consumer Protection Act, 2019)** के अंतर्गत यदि कोई संस्था झूठे या भ्रामक दावे करती है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
स्थानीय हालात –सिवनी में कई छोटे-बड़े कोचिंग संस्थान बिना किसी लिखित अनुमति के छात्रों की तस्वीरें और रिजल्ट बोर्ड्स लगाकर अपने कोचिंग की सफलता दर्शा रहे हैं। इस पर न तो छात्रों से अनुमति ली जा रही है और न ही अभिभावकों से।
विशेषज्ञों की राय-शैक्षणिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह न केवल दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है, बल्कि छात्रों की निजता पर भी आघात है। यदि किसी छात्र की तस्वीर का गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाता है, तो वह मानसिक रूप से भी प्रभावित हो सकता है।
रकार के नियम स्पष्ट हैं –किसी भी छात्र की तस्वीर या नाम का उपयोग उसकी सहमति के बिना नहीं किया जा सकता। कोचिंग संस्थानों को चाहिए कि वे प्रचार-प्रसार के लिए नैतिक और कानूनी मानकों का पालन करें, वरना उनके खिलाफ कार्रवाई संभव है।
राष्ट्र चंडिका न्यूज़, सिवनी.शहर में तेजी से बढ़ते कोचिंग संस्थानों के बीच प्रतिस्पर्धा ने एक नई बहस को जन्म दिया है। कई कोचिंग सेंटर अपने प्रचार में सफल छात्रों की तस्वीरें और नाम prominently प्रदर्शित कर रहे हैं। यह तस्वीरें बोर्ड परीक्षाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं या अन्य शैक्षणिक उपलब्धियों से जुड़ी होती हैं। लेकिन सवाल यह उठता है — क्या यह तरीका वैध है और क्या यह केंद्र सरकार द्वारा तय दिशा-निर्देशों के अनुरूप है?
सरकारी दिशा-निर्देश क्या कहते हैं?- शिक्षा मंत्रालय और उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा समय-समय पर जारी किए गए दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि:
1. विद्यार्थी की स्पष्ट सहमति के बिना उसकी तस्वीर या उपलब्धि को किसी प्रचार सामग्री में उपयोग करना गलत है।
2. यदि तस्वीर लगाई भी जाती है, तो कोचिंग संस्थान को यह साबित करना होगा कि छात्र वास्तव में उसी संस्था से पढ़ा है और उसका प्रदर्शन उसी के मार्गदर्शन में हुआ है।
3. भ्रामक विज्ञापन अधिनियम (Consumer Protection Act, 2019)** के अंतर्गत यदि कोई संस्था झूठे या भ्रामक दावे करती है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
स्थानीय हालात –सिवनी में कई छोटे-बड़े कोचिंग संस्थान बिना किसी लिखित अनुमति के छात्रों की तस्वीरें और रिजल्ट बोर्ड्स लगाकर अपने कोचिंग की सफलता दर्शा रहे हैं। इस पर न तो छात्रों से अनुमति ली जा रही है और न ही अभिभावकों से।
विशेषज्ञों की राय-शैक्षणिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह न केवल दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है, बल्कि छात्रों की निजता पर भी आघात है। यदि किसी छात्र की तस्वीर का गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाता है, तो वह मानसिक रूप से भी प्रभावित हो सकता है।
सरकार के नियम स्पष्ट हैं -किसी भी छात्र की तस्वीर या नाम का उपयोग उसकी सहमति के बिना नहीं किया जा सकता। कोचिंग संस्थानों को चाहिए कि वे प्रचार-प्रसार के लिए नैतिक और कानूनी मानकों का पालन करें, वरना उनके खिलाफ कार्रवाई संभव है।