छात्रों की मेहनत, कोचिंग की मनमानी -न नियम, न जिम्मेदारी
सिवनी जिले में कोचिंग संस्थान बिना किसी वैधानिक पंजीकरण और निगरानी के खुलेआम संचालित हो रहे हैं। इन संस्थानों में पढ़ाने वालों की योग्यता पर सवाल हैं, लेकिन प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। कोचिंग संस्थाएं पढ़ाई की गुणवत्ता से अधिक प्रचार-प्रसार और मनमानी फीस पर ज़ोर दे रही हैं। स्कूलों से छात्रों की जानकारी लेकर उन्हें बहलाने की कोशिश की जाती है।
राष्ट्र चंडिका न्यूज़, सिवनी। जिले में कोचिंग कारोबार बेखौफ सिवनी जिले में कोचिंग संस्थानों का संचालन बगैर किसी वैधानिक रजिस्ट्रेशन और निगरानी के धड़ल्ले से किया जा रहा है। न कोई प्रशासनिक अनुमति, न ही कोई गुणवत्ता का आकलन—फिर भी इन कोचिंग संस्थानों द्वारा मनमानी फीस वसूल की जा रही है। इन पर किसी प्रकार की सरकारी लगाम नहीं है।
शिक्षकों की योग्यता पर सवाल इन संस्थानों में पढ़ा रहे शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता और शिक्षण क्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं। अगर इनकी जांच हो, तो कई शिक्षक अयोग्य पाए जा सकते हैं। बावजूद इसके प्रशासन की आंखें मूंदे बैठी हैं।
गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा देने के बजाय ये कोचिंग सेंटर भारी-भरकम प्रचार प्रसार कर अभिभावकों को भ्रमित कर रहे हैं। होर्डिंग, बैनर और सोशल मीडिया प्रचार के जरिए फर्जी छवि प्रस्तुत की जाती है।
बोर्ड परीक्षा की तैयारी के नाम पर छात्रों और उनके अभिभावकों से फार्म भरवाने, कॉपी लिखवाने और यहां तक कि नकल कराने तक के लिए पैसे वसूले जाते हैं। कई संस्थान तो फर्जी रूप से परीक्षा फार्म भी भरवाते हैं।
कोचिंग संचालन के लिए भारत सरकार द्वारा बनाए गए दिशा-निर्देशों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है। 2024 में सरकार ने देशभर में 45 कोचिंग संस्थानों को नोटिस और 19 संस्थानों पर 61 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था, परंतु सिवनी में अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई है।
बिना अनुमति के सफल छात्रों की तस्वीरों के साथ भ्रामक विज्ञापन करना आम हो गया है। इसके अलावा, कोचिंग सेंटर परीक्षा के बाद झूठी शान दिखाने के लिए होर्डिंग्स लगाते हैं, अंकों को अपनी शिक्षण पद्धति का परिणाम बताया जाता है।
राजस्व की क्षति:अवैध रूप से संचालित संस्थान शासन को टैक्स से वंचित कर रहे हैं।
सख्त कार्रवाई:सिवनी में भी दिल्ली जैसे कड़े कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
सबसे गंभीर चिंता की बात यह है कि इन सभी गतिविधियों के बावजूद शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। क्या सिवनी में भी अखिल भारतीय स्तर की तरह सख्त कार्रवाई होगी? यह अब भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है।
सिवनी जिले में कोचिंग संस्थानों की अनियमितता, शैक्षणिक गुणवत्ता की गिरावट और प्रशासनिक उदासीनता एक गंभीर मुद्दा बन चुकी है। अब समय आ गया है कि इस दिशा में सख्त कार्रवाई की जाए ताकि शिक्षा की साख और छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।