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बिहार में NDA की ‘प्रचंड जीत’, पर सिवनी ज़िला भाजपा में पसरा सन्नाटा

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राष्ट्र चंडिका न्यूज़. सिवनी। जहाँ एक ओर बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने प्रचंड जीत हासिल कर दिल्ली तक जश्न का माहौल बना दिया है, वहीं मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं के बीच असामान्य रूप से सन्नाटा पसरा हुआ है।
पार्टी के प्रदेशव्यापी और राष्ट्रीय स्तर के जश्न से उलट, सिवनी भाजपा कार्यालयों और नेताओं के आवासों पर कोई विशेष उत्साह या आतिशबाजी देखने को नहीं मिली। इस चुप्पी ने स्थानीय राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जीत का जश्न क्यों हुआ फीका?
बिहार में भाजपा की ऐतिहासिक जीत (सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने) के बावजूद, सिवनी के कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ पदाधिकारियों में वह अपेक्षित खुशी और सक्रियता नहीं दिखी, जो अमूमन ऐसी बड़ी विजय पर दिखाई देती है।
अदृश्य कार्यकर्ता: सामान्यतः, बड़ी जीत पर कार्यकर्ता मिठाई बाँटने और नारेबाजी के लिए एकत्रित होते हैं, लेकिन सिवनी में अधिकांश कार्यकर्ता मैदान से नदारद दिखे।
वरिष्ठों की चुप्पी: जिले के कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी भी सार्वजनिक रूप से बयान देने या जश्न में शामिल होने से बचते नज़र आए। फोन पर भी कई नेताओं ने संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी, लेकिन खुले दिल से खुशी व्यक्त नहीं की।
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुप्पी के पीछे दो प्रमुख कारण हो सकते हैं:
स्थानीय गुटबाज़ी: जिले के भीतर चल रही गहरी आंतरिक गुटबाज़ी और मनमुटाव, जिसके कारण एक खेमा दूसरे खेमे की सफलता पर खुलकर उत्साह व्यक्त करने से बच रहा है। कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच तालमेल की कमी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।
भविष्य की चिंता: कुछ नेताओं को लगता है कि बिहार की यह जीत, आगामी स्थानीय चुनावों (जैसे नगरीय निकाय या पंचायत चुनाव) के लिए नेतृत्व और टिकट वितरण की रणनीति को प्रभावित कर सकती है, जिससे अपनी राजनीतिक भविष्य को लेकर एक अनिश्चितता का माहौल है।
कार्यकर्ताओं के मन में निराशा
नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने बताया, “राष्ट्रीय स्तर पर इतनी बड़ी जीत हुई है, खुशी तो है, लेकिन यहाँ का माहौल देखकर लगता है जैसे कार्यकर्ताओं का मन टूटा हुआ है। उत्साह का यह अभाव पार्टी संगठन के लिए एक बड़ा संकेत है।”
इस सन्नाटे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय स्तर की सफलता भी तब तक स्थानीय कार्यकर्ताओं में जान नहीं फूंक सकती, जब तक संगठन के भीतर की आंतरिक विसंगतियों को दूर नहीं किया जाता।

 

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