राष्ट्र चंडिका न्यूज़। सिनेमा जगत में किसी कलाकार की मृत्यु के बाद उसके काम को श्रद्धांजलि देना आम बात है, लेकिन बॉलीवुड के दिग्गज कॉमेडियन और चरित्र अभिनेता असरानीके मामले में एक अनोखा और कुछ हद तक विवादित चलन देखने को मिल रहा है। उनकी मृत्यु के बाद भी, उनके अभिनय वाले कई टेलीविजन और डिजिटल विज्ञापन आज भी धड़ल्ले से प्रसारित हो रहे हैं, जिससे दर्शकों और विज्ञापन जगत में एक बड़ी बहस छिड़ गई है।
टेलीविजन पर ‘जीते-जागते’ असरानी
असरानी, जिन्हें ‘हम अंग्रेजों के ज़माने के जेलर हैं’ जैसे संवादों के लिए जाना जाता है, का निधन 20 अक्टूबर 2025 को हुआ था। इसके बावजूद, कई प्रमुख ब्रांडों के लिए फिल्माए गए उनके विज्ञापन, जिनमें वे पूरी तरह से जीवंत और सक्रिय दिखते हैं, प्राइम टाइम स्लॉट में दिखाई दे रहे हैं। ये विज्ञापन दर्शकों को यह भ्रम भी दे रहे हैं कि अभिनेता अभी भी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला कॉपीराइट, एग्रीमेंट क्लॉज़ और एथिक्स की एक जटिल पहेली है।
कानूनी पेंच और नैतिक दुविधा
विज्ञापन अनुबंध- आमतौर पर, विज्ञापन अनुबंध एक निश्चित अवधि या निश्चित संख्या में प्रसारण के लिए होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि असरानी के निधन से पहले ही ये विज्ञापन ब्रांडों द्वारा खरीदे जा चुके थे और उनके प्रसारण की अवधि अभी समाप्त नहीं हुई है।
ब्रांड वैल्यू- कुछ ब्रांड्स अपनी मार्केटिंग रणनीति के तहत इन विज्ञापनों को जारी रख रहे हैं क्योंकि असरानी का चेहरा और उनका कॉमिक अंदाज़ उत्पाद के साथ एक मजबूत पहचान बना चुका है। उनका मानना है कि इन विज्ञापनों को हटाने से ब्रांड को नुकसान हो सकता है।
नैतिक प्रश्न: यह स्थिति एक गंभीर नैतिक सवाल खड़ा करती है: क्या किसी दिवंगत कलाकार की छवि का इस्तेमाल व्यावसायिक लाभ के लिए जारी रखना उचित है? फिल्म जगत के कुछ लोगों ने इसे दिवंगत आत्मा के प्रति अनादर बताया है, जबकि विज्ञापन एजेंसियां इसे केवल एक ‘वैध अनुबंध’ का पालन बता रही हैं।
कोट (उद्योग विशेषज्ञ)- ‘भारत में मृत कलाकारों की छवि के उपयोग को लेकर स्पष्ट कानूनी दिशानिर्देशों की कमी है। यह मामला दिखाता है कि हमें ‘राइट्स ऑफ पब्लिसिटी’ को कलाकार की मृत्यु के बाद भी सुरक्षित रखने के लिए नए नियमों की आवश्यकता है। ‘
आगे क्या?
यह देखना होगा कि असरानी का परिवार या फिल्म उद्योग की संस्थाएँ इस मामले में कोई कानूनी कार्रवाई करती हैं या नहीं। यह घटना भविष्य में होने वाले सभी विज्ञापन और ब्रांड एंडोर्समेंट समझौतों के लिए एक महत्वपूर्ण सबक साबित हो सकती है, जिसमें कलाकार की मृत्यु की स्थिति में उसके विज्ञापनों के प्रसारण को लेकर स्पष्ट शर्तें जोडऩी होंगी।