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बोकारो शिक्षा विभाग में बड़ा घोटाला: दिवंगत शिक्षक के नाम पर 14.65 लाख की अवैध निकासी, आरोपी शिक्षक निलंबित

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बोकारो (झारखंड): बोकारो जिले में वित्तीय अनियमितताओं और घोटालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बोकारो ट्रेजरी से पुलिस विभाग के वेतन मद में हुई अवैध निकासी का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब जिला शिक्षा विभाग में भी एक बड़ा वित्तीय घोटाला उजागर हुआ है। मामला बोकारo जिले के पेटरवार प्रखंड अंतर्गत ‘उत्क्रमित मध्य विद्यालय सदमाकला’ का है, जहाँ वर्ष 2021 में दिवंगत हो चुके शिक्षक संतोष कुमार शर्मा के नाम पर कथित तौर पर तीन फर्जी बिल तैयार कर ₹14.65 लाख की अवैध निकासी कर ली गई। इस गबन की आधिकारिक पुष्टि जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) अतुल चौबे ने की है। उन्होंने बताया कि शासकीय राशि के गबन का प्रकरण संज्ञान में आने के बाद जांच समिति गठित कर दी गई है तथा मुख्य आरोपी शिक्षक को निलंबित कर दिया गया है।

⚖️ आरोपी शिक्षक निलंबित, परंतु अभी तक FIR दर्ज न होने पर प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल

मामला सार्वजनिक होने के उपरांत विभाग ने कार्रवाई करते हुए संबंधित शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

तथापि, घटना के इतने दिन बीत जाने के बावजूद आरोपी के विरुद्ध आपराधिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज न कराए जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। पूरे प्रकरण की गहन छानबीन जारी है और जांच के दौरान कई अन्य चौंकाने वाले तथ्यों के उजागर होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु स्थापना उप समाहर्ता को त्रिस्तरीय जांच कमेटी गठित करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

🔍 गबन की पूरी अवधि और अन्य सह-आरोपी शिक्षकों की भूमिका खंगाल रही जांच टीम: DSE अतुल चौबे

मामले के संबंध में जानकारी देते हुए जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) अतुल चौबे ने बताया कि एक शिक्षक द्वारा कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर शासकीय धनराशि की अवैध निकासी का मामला हमारे संज्ञान में आया है।

संबंधित आरोपी द्वारा गलत हथकंडों से राशि आहरित की गई है। इस पूरी गबन अवधि के दौरान क्या-क्या विभागीय गतिविधियां संचालित हुईं, उसकी बिंदुवार सूक्ष्म जांच की जा रही है। जांच में जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

🏛️ जून महीने से चल रही थी जांच, विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ दर्ज कराया जाएगा आपराधिक मुकदमा

DSE ने आगे बताया कि यह मामला विगत जून माह से प्रक्रियाधीन था।

विगत वर्षों के दौरान आरोपी द्वारा इस प्रकार की कितनी अन्य अवैध निष्कासनों को अंजाम दिया गया है तथा इस सुनियोजित षड्यंत्र में किसी अन्य विभागीय शिक्षक या लिपिक की संलिप्तता है या नहीं, इसकी भी गहराई से पड़ताल की जा रही है। लगभग ₹12 से ₹14.65 लाख की अवैध निकासी का यह अत्यंत गंभीर मामला है, जिसमें तीन अलग-अलग बिलों पर एक ही नाम का उपयोग कर राशि निकाली गई। DSE ने स्पष्ट किया कि मामला बेहद गंभीर श्रेणी का है; अतः विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के अतिरिक्त सुसंगत आपराधिक धाराओं के तहत कानूनी प्रक्रिया भी अमल में लाई जाएगी।

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