स्कूल, कॉलेज, कोचिंग और लाइब्रेरी के घालमेल से भविष्य दांव पर: बारापत्थर क्षेत्र का मामला
राष्ट्र चंडिका न्यूज़,सिवनी। जिले में शिक्षा के व्यवसायीकरण का एक ऐसा उदाहरण सामने आया है जिसने शासन के तमाम नियमों को ताक पर रख दिया है। शहर के बारापत्थर क्षेत्र में एक ही कैंपस के भीतर स्कूल, कंप्यूटर कॉलेज, कोचिंग संस्थान और अब एक लाइब्रेरी का भी संचालन किया जा रहा है। व्यावसायिक लाभ के लिए एक ही भवन का यह “कॉम्प्लेक्स मॉडल” छात्रों के शैक्षणिक वातावरण को न केवल दूषित कर रहा है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से एक “टाइम बम” साबित हो सकता है।
क्या कहते हैं शासन के कड़े नियम?
मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग और उच्च शिक्षा विभाग के स्पष्ट निर्देश हैं कि शैक्षणिक संस्थानों का संचालन ‘खिचड़ी’ की तरह नहीं किया जा सकता।
स्वतंत्र परिसर की अनिवार्यता: स्कूल शिक्षा विभाग के ‘मान्यता नियम’ के अनुसार, विद्यालय के पास स्वतंत्र भूमि और भवन होना चाहिए। उस आवंटित परिसर का उपयोग किसी अन्य व्यावसायिक गतिविधि या कॉलेज के लिए करना मान्यता रद्द करने का आधार है।
लाइब्रेरी और कोचिंग का अवैध मिश्रण: नियमानुसार, स्कूल और कॉलेज की अपनी निजी लाइब्रेरी होनी चाहिए, लेकिन एक व्यावसायिक ‘पब्लिक लाइब्रेरी’ को उसी परिसर में संचालित करना, जहाँ बाहरी लोगों का आना-जाना हो, स्कूल की गोपनीयता और सुरक्षा को भंग करता है।
कोचिंग एक्ट का उल्लंघन: ‘कोचिंग संस्थान पंजीकरण नियमावली’ के तहत, किसी भी कोचिंग का संचालन उस स्थान पर नहीं हो सकता जहाँ नियमित विद्यालय चल रहा हो। यह स्कूली घंटों और संसाधनों का खुला दुरुपयोग है।
सुरक्षा और संसाधनों पर बढ़ा संकट: एक गेट, सौ खतरे
बारापत्थर स्थित इस परिसर में संसाधनों का जिस तरह से “साझा” उपयोग हो रहा है, वह चिंताजनक है:
मिश्रित भीड़: छोटे स्कूली बच्चे, कॉलेज के युवा और लाइब्रेरी व कोचिंग में आने वाले बाहरी प्रतियोगी छात्र—इन सभी का एक ही परिसर में होना बच्चों की सुरक्षा (Child Safety) के लिए बड़ा खतरा है।
मानक ध्वस्त: नियमतः हर संस्थान के लिए अलग फायर एनओसी’ और ‘बिल्डिंग फिटनेस’ जरूरी है। एक ही भवन में इतनी भीड़ के लिए आपातकालीन निकासी (Emergency Exit) की कोई व्यवस्था नजर नहीं आती।
स्वच्छता का अभाव: एक ही टॉयलेट और पेयजल स्रोतों का उपयोग स्कूली बच्चों से लेकर वयस्कों तक द्वारा किया जाना स्वास्थ्य मानकों के विरुद्ध है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
इस अव्यवस्था को लेकर बारापत्थर क्षेत्र के नागरिक और अभिभावक आक्रोशित हैं। लोगों का सवाल है कि:
क्या जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और प्रशासन ने कभी इस परिसर का भौतिक सत्यापन किया है?
क्या कागजों पर फर्जी नक्शे दिखाकर इन सभी संस्थानों की मान्यता प्राप्त की गई है?
स्कूल और कॉलेज के बीच अनिवार्य ‘विभाजन दीवार’ (Partition Wall) और अलग प्रवेश द्वार कहाँ हैं?
नागरिकों की मांग: क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि जिला प्रशासन तत्काल इस परिसर के *भूमि उपयोग परिवर्तन’ (Diversion) और सभी संस्थानों के संबद्धता पत्रों की उच्च स्तरीय जांच करे। यदि नियम विरुद्ध संचालन पाया जाता है, तो तत्काल प्रभाव से भवन को सील कर मान्यता रद्द की जाए।