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बड़े सटोरियों की ‘दहाड़’ और पुलिस की ‘लाचारी’ – क्या केवल छोटे मोहरों को पकड़कर खानापूर्ति कर रहा प्रशासन?

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सिवनी में आईपीएल सट्टे का ‘ब्लैक होल’, खाकी की साख दांव पर!

राष्ट्र चंडिका न्यूज़,सिवनी। जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण अंचलों में इन दिनों आईपीएल (IPL) के नाम पर करोड़ों रुपये का काला खेल खेला जा रहा है। सट्टेबाजी का यह संक्रमण अब केवल शौक नहीं, बल्कि एक संगठित अपराध का रूप ले चुका है। हाल ही में पुलिस द्वारा की गई छिटपुट गिरफ्तारियों के बाद सट्टा जगत के दिग्गजों के हौसले पस्त होने के बजाय और बढ़ गए हैं। चर्चा तो यहाँ तक है कि मुख्य सरगना अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर तंज कसते हुए कह रहे हैं- “दम है तो हमें पकड़ कर दिखाओ।”
हाईटेक सिंडिकेट- मोबाइल की स्क्रीन पर लुट रही युवाओं की जिंदगी
सट्टे का यह खेल अब पुराना नहीं रहा। आधुनिक दौर में सटोरियों ने ‘ऑनलाइन बैटिंग एक्सचेंज’ और ‘क्रिप्टो पेमेंट’ का सहारा ले लिया है। दुबई और अन्य बड़े शहरों से जुड़ी ‘लाइन’ के माध्यम से सिवनी में सट्टे की मास्टर आईडी (Master ID) चलाई जा रही है।
 कोडवर्ड का खेल- यहाँ हार-जीत के सौदे ‘पॉइंट्स’ में होते हैं, ताकि पकड़े जाने पर पुलिस को हिसाब-किताब समझाने में सट्टेबाज बच निकलें।
 बदली रणनीति- पुलिस की रेड से बचने के लिए मास्टरमाइंड अब शहर के बीचों-बीच नहीं, बल्कि लग्जरी गाड़ियों में घूमते हुए या सुनसान इलाकों के फार्म हाउसों से अपना नेटवर्क ऑपरेट कर रहे हैं।
पुलिस की कार्रवाई-‘ऊंट के मुंह में जीरा’
बीते सप्ताह पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर कुछ सट्टा खिलाने वालों को दबोचा। पुलिस इसे अपनी बड़ी कामयाबी बता रही है, लेकिन जागरूक नागरिकों का मानना है कि ये केवल ‘मोहरे’ हैं।
“पुलिस जिन लड़कों को पकड़ती है, वे महज 500 से 1000 रुपये की दिहाड़ी पर काम करने वाले ‘पंटर’ होते हैं। असली ‘बुकी’ जो शहर में सट्टे का सिंडिकेट चला रहे हैं, वे आज भी आलीशान होटलों में बैठकर मैच का आनंद ले रहे हैं।”
सट्टे के दलदल में धंसता सिवनी का भविष्य
इस अवैध धंधे का सबसे काला पक्ष यह है कि शहर के कॉलेज छात्र और मध्यमवर्गीय परिवार इसके जाल में फंस रहे हैं। रातों-रात अमीर बनने का सपना दिखाकर सटोरिए युवाओं को कर्ज के जाल में धकेल रहे हैं। सूत्रों की मानें तो सट्टे में हारे हुए कई युवा अब चोरी और लूट जैसे अपराधों की ओर भी मुड़ रहे हैं, जो शहर की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।
सफेदपोशों और रसूखदारों का संरक्षण?
यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इन सटोरियों को किसी राजनीतिक रसूखदार का संरक्षण प्राप्त है? अक्सर देखा जाता है कि जब भी किसी बड़े सटोरिये का नाम सामने आता है, तो जांच की दिशा अचानक मुड़ जाती है। क्या यही कारण है कि पुलिस केवल उन तक पहुँचती है जिनके पास ‘पहुंच’ नहीं है?
जनता की मांग- ‘बड़े नामों’ का हो खुलासा
सिवनी की जनता अब कागजी कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है। लोगों की मांग है कि:
 उन मेन आईडी होल्डर्स को बेनकाब किया जाए जो करोड़ों का टर्नओवर कर रहे हैं।
  सट्टे के पैसे से बनाई गई अवैध संपत्तियों की जांच की जाए।
  सट्टेबाजों के कॉल डिटेल्स खंगाले जाएं ताकि उनके मददगारों का असली चेहरा सामने आ सके।
अगर पुलिस प्रशासन अब भी केवल ‘छोटे खिलाड़ियों’ को पकड़कर अपनी पीठ थपथपाता रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब यह सट्टा सिवनी की कानून व्यवस्था को पूरी तरह निगल जाएगा। पुलिस कप्तान को चाहिए कि वे एक विशेष टीम गठित करें जो सीधे सट्टे के ‘हेडक्वार्टर’ पर प्रहार करे, न कि केवल फुटपाथ पर खड़े सटोरियों पर।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर संदेह के बादल
हालिया गिरफ्तारियों को जनता केवल एक ‘दिखावा’ मात्र मान रही है। जब तक सट्टे की जड़ यानी ‘मेन आईडी होल्डर्स’ पर प्रहार नहीं होगा, तब तक सिवनी की शांति भंग करने वाला यह अवैध कारोबार बंद नहीं होगा। यदि जल्द ही बड़े मगरमच्छ पुलिस के जाल में नहीं फंसे, तो खाकी के इकबाल पर सवाल उठना लाजिमी है।
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